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हत्या कहूँ या मृत्यु कहूँ

काव्य संख्या-215 ============= हत्या कहूँ या मृत्यु कहूँ ============= बता इसे मैं क्या कहूँ हत्या कहूँ या मृत्यु कहूँ तुम्हारे लिए तो बस ये आकड़े हैं उसके लिए क्या जिसने अपने बच्चे खोएं हैं सत्ता ...

यथार्थ से हुआ सामना

काव्य संख्या-214 ============= यथार्थ से हुआ सामना ============= सपनों में जी रहा था मैं धरती को छोड़ आसमान में उड़ रहा था मैं जबकि खुद के पंख नहीं थे मेरे फिर भी उसे अपना समझ रहा था मैं जिंदगी को बहुत ...