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हे ईश्वर !

हे ईश्वर (30/05/2018) ================= हे इश्वर ! तुमने कैसा जहां बनाया था यह कैसा बन गया है आदमी, आदमी से जलता है इसने पशुता को भी पीछे छोड़ दिया है इनके आंखों में प्यार की बजाय खून दिखाई देता है हर तरफ...

फिर एक नई सुबह

काव्य संख्या-177 08/05/2018 ---------------------- एक नई सुबह ---------------------- एक नई सुबह / एक नयी उमंग नये उम्मीदों के संग / बढ़ चले हैं हम / बिना अंजाम की परवाह किए / हर दिन एक नई चुनौतियों के साथ / हर दिन एक नया सबक / एक जिद एक ...