ऐलै-ऐलै हो चुनाव क दिनमा

काव्य संख्या-212
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ऐलै-ऐलै हौ चुनाव क दिनमा
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ऐलै-ऐलै हौ चुनाव क दिनमा,
सैज गेले बैनर-पोस्टर स,
सबै गांव-शहरवा,
गली-मोहल्ला खेत-खलिहान,
घूम रहल छथिन नेताजी,
बनाय रहल छथिन,
सबै स सुख-दुख क साथी,
बहिन-भाय चाचा-चाची मौसी क
जोड़ रहलखिन हन लोगन स रिश्ता,
देखियो एक-एक वोट के खातिर,
की-की कैर रहल छथिन नेताजी,
घूम रहल छथिन नेताजी,
मंदिर-मस्जिद-गुरूद्वारा,
खोज रहल छथिन नेताजी,
अप्पन जात-बिरादरी औरों धरम के लोगन क,
बड़-बड़ बात बोलै छथिन नेताजी,
आम भल-मानुस जनता क,
दिखाय रहल छथिन,
लोगन क बड़-बड़ सपना,
बांट रहलखिन हन,
दारु क बोतल औरो चखना,
कैर रहलखिन हन जोर-शोर से प्रचार,
हे दादी हे काकी हे चाची,
बटन दबायब हम्मर चुनाव चिह्न पर,
हमही छि अहां क अप्पन,
हमही करब सब काम अपनै क,
ऐलै-ऐलै हौ चुनाव क दिनमा।
                प्रियदर्शन कुमार

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