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जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जरूरत

काव्य संख्या-222 ============ जरूरत ============ चिंता नहीं, चिंतन की जरूरत है, जंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए, एक रणनीति की जरूरत है। तानाशाह से मुक्ति पाने के लिए, एकता की जरूरत है न जाति की न धर्म ...

लोग

नगर-नगर हर डगर चले लोग, अपनी परछाइयों से पीछा छुड़ाने को लोग, खो गये भीड़ में कहीं, अब अपने आप को ढूंढ़ते हैं लोग। प्रियदर्शन कुमार

अधिकार

अधिकार खो कर जीने से बेहतर है, अधिकार के लिए लड़ते हुए मर जाना।                               प्रियदर्शन कुमार

जनता

तुम्हारे हर काम का मैं क्यों सराहना करूं, ग़लत को ग़लत नहीं, तो और क्या कहूं। तुम्हें चुना है हमने, फिर अपने सवाल किससे करूं।

सोच रहे हैं साहब

काव्य संख्या - 221 ==================== सोच रहे हैं साहब ==================== हुगली नदी  में सोच रहे हैं  साहब अब कौन-सी गुगली  फेंकी  जाए? बचा-खुचा जो हिस्सा है भारत का उसमें भी क्यों न आग लगायी जाए? अब भी मुस्लिम प...

कुछ तो बात है भारत की मिट्टी

कुछ तो बात है भारत की मिट्टी में, चोट किसी को लगती है, दर्द किसी और को होता है। बहुत कोशिशें की, उन्होंने इसे तोड़ने की, अब खुद ही टूटकर बिखर रहे हैं।                     प्रियद...

कब तक रोक पाओगे तुम

बगावत को कब तक रोक पाओगे तुम, चिंगारियों को आग में बदलने से, कब तक रोक पाओगे तुम, अपने-आपको जलने से, कब तक रोक पाओगे तुम, इतनी-सी बातें समझ में नहीं आती तुम्हें, मेरे मकान के बगल म...