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फ़रवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दंगा

काव्य संख्या-224 ================ दंगा ================ साम्प्रदायिकता की आग में ख़त्म हो गये सब रिश्ते नाते उन बस्तियों को जला दिया उन्होंने, जिनमें वर्षों से साथ रह रहे थे हम सारे, थी मुस्कान उनके हों...

गुड़िया

काव्य संख्या-223 ================= गुड़िया ================= है जिम्मेदारियों का अहसास तभी तो आगे बढ़ रहा हिन्दुस्तान। पेट की आग और देश की परवाह दोनों को साथ लेकर बढ़ रही है गुड़िया।। न दुनिया की परवाह क...

राष्ट्रवाद बनाम् अंधराष्ट्रवाद

                    राष्ट्रवाद बनाम अंधराष्ट्रवाद =================================                बहुत बांटे घर-घर जाकर तूने पर्चे,                     पर बांट न पाया प्यार को।                      ...

प्रतिकार

बहुत बांटे घर-घर जाकर तूने पर्चे, पर बांट न पाया प्यार को। जा तुझे नकार दिया, रोक न पाया तू जनता के प्रतिकार को।। प्रियदर्शन कुमार

शिक्षा और समाज : वर्तमान संदर्भ

शिक्षा और समाज : वर्तमान संदर्भ ===========   ========      अक्सर कहा जाता है कि शिक्षा किसी भी समाज के उन्नति की नींव होती है। शिक्षा के द्वारा ही किसी भी समाज और देश को बुलंदियों पर पहुंचा ज...

सुनो कवि

सुनो कवि भावनाएँ होती हैं बहुत ही संवेदनशील खाद्य-पानी मिलाकर इन्हें उर्वर बनाया जाता है ताकि जन भावनाओं के साथ खेला जाए जनता की भावनाओं का राजनीतिकरण कर चुनाव में उपयो...