संदेश

ऐलै-ऐलै हो चुनाव क दिनमा

काव्य संख्या-212 ================= ऐलै-ऐलै हौ चुनाव क दिनमा ================= ऐलै-ऐलै हौ चुनाव क दिनमा, सैज गेले बैनर-पोस्टर स, सबै गांव-शहरवा, गली-मोहल्ला खेत-खलिहान, घूम रहल छथिन नेताजी, बनाय रहल छथिन, सबै स स...

शहादत

बहुत उमड़ रहा प्रेम लोगों में जवानों की शहादत पर कहां थे वे जब बरस रही थी लाठियां इन जवानों पर। ये  कैसा छद्म  देशभक्ति  है कोई  जाकर पुछे उनसे बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू निक...

आरक्षण

काव्य संख्या-209 =========== आरक्षण =========== चलो, उसने कुछ तो दिया, नौकरी न सही, आरक्षण तो दिया, झूठा ही सही, सबका साथ सबका विकास तो किया, सबके हाथ में लॉलीपॉप तो दिया, एससी-एसटी-ओबीसी को ही नहीं, मु...

पुनर्नवजागरण

पुनर्नवजागरण ===========             मेरे द्वारा दिए गए पुनर्नवजागरण शीर्षक पर पाठकों को आपत्ति हो सकती है कि ये क्या नया शब्द गढ़ लिया है, वो भी 21वीं सदी में, जबकि यह काल ज्ञान-विज्ञा...

नव-वर्ष

नव वर्ष ===== नव वर्ष नयी उम्मीद नये उमंग नयी सोच नये विचार नया आगाज नये लक्ष्य नया स्वप्न नये इरादे नयी कसमें नये वादे के साथ नया करने नया पाने के लिए बढ़े हम बढ़े सब इसी के सा...

आशा

आशा ============== धूंधला-सा हो गया हूँ मैं धूंधली-सी हो गई है मेरी छाया ढ़ल गया है दिन छा गया है अंधेरा इंतजार है उसे भी इंतजार है मुझे भी ये दिन भी गुजर जाएगा हमारे भी आएंगे अच्छे दिन सम...

अतीत बनाम वर्तमान

अतीत बनाम वर्तमान ====================================         अतीत और वर्तमान के बीच अपनी-अपनी प्रमुखता को लेकर बहस चल रही थी। वर्तमान ने अतीत से कहा कि तुम मेरे विकास में बाधक हो। मैं जब भी तुम्हें भूला...