संदेश

हत्या कहूँ या मृत्यु कहूँ

काव्य संख्या-215 ============= हत्या कहूँ या मृत्यु कहूँ ============= बता इसे मैं क्या कहूँ हत्या कहूँ या मृत्यु कहूँ तुम्हारे लिए तो बस ये आकड़े हैं उसके लिए क्या जिसने अपने बच्चे खोएं हैं सत्ता ...

यथार्थ से हुआ सामना

काव्य संख्या-214 ============= यथार्थ से हुआ सामना ============= सपनों में जी रहा था मैं धरती को छोड़ आसमान में उड़ रहा था मैं जबकि खुद के पंख नहीं थे मेरे फिर भी उसे अपना समझ रहा था मैं जिंदगी को बहुत ...

राजनीति

काव्य संख्या-213 =================== राजनीति =================== मैं लौट जाउंगा फिर अपनी कविता की दुनिया में, कुछ पल ठहर जाने दो मुझे राजनीति की दुनिया में, मैं देख लेना चाहता हूँ इसकी सीमाओं को, मैं छान लेना च...

ऐलै-ऐलै हो चुनाव क दिनमा

काव्य संख्या-212 ================= ऐलै-ऐलै हौ चुनाव क दिनमा ================= ऐलै-ऐलै हौ चुनाव क दिनमा, सैज गेले बैनर-पोस्टर स, सबै गांव-शहरवा, गली-मोहल्ला खेत-खलिहान, घूम रहल छथिन नेताजी, बनाय रहल छथिन, सबै स स...

शहादत

बहुत उमड़ रहा प्रेम लोगों में जवानों की शहादत पर कहां थे वे जब बरस रही थी लाठियां इन जवानों पर। ये  कैसा छद्म  देशभक्ति  है कोई  जाकर पुछे उनसे बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू निक...

आरक्षण

काव्य संख्या-209 =========== आरक्षण =========== चलो, उसने कुछ तो दिया, नौकरी न सही, आरक्षण तो दिया, झूठा ही सही, सबका साथ सबका विकास तो किया, सबके हाथ में लॉलीपॉप तो दिया, एससी-एसटी-ओबीसी को ही नहीं, मु...

पुनर्नवजागरण

पुनर्नवजागरण ===========             मेरे द्वारा दिए गए पुनर्नवजागरण शीर्षक पर पाठकों को आपत्ति हो सकती है कि ये क्या नया शब्द गढ़ लिया है, वो भी 21वीं सदी में, जबकि यह काल ज्ञान-विज्ञा...