संदेश

21वीं सदी

काव्य संख्या-201 ============================ 21वीं सदी ============================ 21वीं  सदी  में भारत  की तस्वीर कैसी बन गई मूल्य-नैतिकता आचार-विचार सब लुप्त हो गई। कहां से हम चले थे और कहां पहुंच गए हम अपनी परंपराओं को कैसे ...

मैं

मैं चाहता हूँ कुछ ऐसा कर जाऊं कि दुनिया अपने दिल में पनाह दे मुझे मैं चाहता हूँ कुछ ऐसा लिख जाऊं कि वह तासीर बन जाएँ मैं चाहता हूँ कि हर लाईब्रेरी का एक हिस्सा मैं बन जाऊं मैं...

मा.. एँ मरती नहीं कभी

----------------------------- माँ.. एँ मरती नहीं कभी ----------------------------- माँ.. एँ मरती नहीं कभी वो रहती हैं हम साया बनके हमेशा हमारे साथ जब भी दुखित मैं होता हूँ मुख से निकलता यकायक माँ एक क्षण में मानो जैसे मेरा सारा ...

सच में, वो आदमी नहीं वो है मौन प्रतिमा-सा

----------------------------- सच में, वो आदमी नहीं वो है मौन प्रतिमा-सा ----------------------------- सच में, वो आदमी नहीं वो है मौन प्रतिमा-सा जिनकी आँखे तो खुली है पर, देख पाने में असमर्थ है जिनके पास कान तो है पर, सुनने में असम...

टूटते सपने

इन नन्हीं-सी आँखों ने बड़े-बड़े सपने पाले हैं कुछ कर गुजरने की इनमें चाहत के हिलोरें हैं लेकिन हालात के आगे ये बेबस नजर आते हैं दिखाई पड़ते हैं इनके टूटते हुए सपने गरीबी की थ...

नीतियां नहीं नियत ठीक करो

कोई जाकर पूछो उनसे कैसे राजा हो तुम हे राजन् ! तूने कैसी नीतियाँ बनायीं प्रजा हो गई है भिखारी क्या ऐसे ही दिन दिखाने को राजा चुना था तुम्हें उन्होंने प्रजा कर रही है त्राहि...

मातृभूमि की वेदना

----------------------------------- सिसक रही है भारत माता, अपने ही लालों की करनी से / हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, पालन-पोषण में, कभी न की अंतर उसने / आखिर क्या परवरिश में कमी रह गई, कि खून के प्यासे हो गए एक-दूजे के /...