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दिसंबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नव-वर्ष

नव वर्ष ===== नव वर्ष नयी उम्मीद नये उमंग नयी सोच नये विचार नया आगाज नये लक्ष्य नया स्वप्न नये इरादे नयी कसमें नये वादे के साथ नया करने नया पाने के लिए बढ़े हम बढ़े सब इसी के सा...

आशा

आशा ============== धूंधला-सा हो गया हूँ मैं धूंधली-सी हो गई है मेरी छाया ढ़ल गया है दिन छा गया है अंधेरा इंतजार है उसे भी इंतजार है मुझे भी ये दिन भी गुजर जाएगा हमारे भी आएंगे अच्छे दिन सम...

अतीत बनाम वर्तमान

अतीत बनाम वर्तमान ====================================         अतीत और वर्तमान के बीच अपनी-अपनी प्रमुखता को लेकर बहस चल रही थी। वर्तमान ने अतीत से कहा कि तुम मेरे विकास में बाधक हो। मैं जब भी तुम्हें भूला...

किसान

काव्य संख्या-207 =========== किसान =========== मैं किसान हूँ मेरा काम है खेती का रहने के नाम पर मेरे पास एक घर है जो फूस का बना है बरसात के दिनों में टप-टप पानी टपकता है गर्मी के मौसम में सूर्य की कि...

बेटा-बेटी

काव्य संख्या-106 ===================== बेटा-बेटी ===================== समय की परिवर्तनशीलता को देखो कभी पराई समझी जाती थी बेटी घर की मेहमान होती थी बेटी घर से बिदा होती थी बेटी बेटी में जन्म लेना अपशकुन समझी जात...

टूटते पत्ते

टूटते पत्ते ====================== वृक्ष से जब पत्ते टूटकर अलग होते हैं पत्ते का अस्तित्व खत्म हो जाता है। जबतक पत्ते वृक्ष से जुड़े रहते हैं, वृक्ष बूढ़ा होकर भी, अपनी क्षमता तक, पत्तों का पा...

जीवन

जिंदगी =========== जीवन में न जाने कितने ही दौर आते हैं कभी सुख कभी दुख कभी हँसना कभी रोना कभी हैरान कभी परेशान कभी अच्छा कभी खराब कभी भला कभी बुरा कभी मिलना कभी बिछड़ना कभी अपनो का स...

अहसास

अहसास =============== मैं हँसता हूँ जब सबके बीच होता हूँ। मैं रोता हूँ जब अकेला होता हूँ। सबका साथ है फिर भी लगता नहीं कोई पास है। भीड़ में हूँ फिर भी अकेला हूँ। चेहरे पर हँसी है फिर भी पी...

बहू

माँ लगाती झाडू-पोछा बहुएं बैठती हैं सेज पर कितना विहंगम दृश्य लगता है कोई जाकर पुछे उन बेशर्मों से लज्जा क्या नहीं आती है उन्हें खुद को पढ़ी-लिखी की दावा करते गौरव से हमेशा ...

तू जिंदगी को मत कोस तू मत हो उदास यूं बैठ

तू जिंदगी को मत कोस तू मत हो उदास यूं बैठ ----------------------------- तू जिंदगी को मत कोस तू मत हो उदास यूं बैठ तू कर्म कर तू कर्म कर तू फल की चिंता मत कर तू नित अपने पथ पर आगे बढ़ता चल बढ़ता चल तू अपने लक्...

खामोशियां भी कुछ कह रहीं हैं

काव्य संख्या-202 =================== खामोशियां भी कुछ कह रहीं हैं =================== खामोशियां भी कुछ कह रहीं हैं उसे समझने की कोशिश करो। सबकुछ लफ्जों में बयां नहीं होता ईशारों में समझने की कोशिश करो। देश क...