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मत बांधो मुझे

मत बांधो मुझे (31/03/2017) =================== मत बांधों मुझे माया-मोह के बंधन में। मैं आजाद होकर उड़ना चाहता हूँ उनमुक्त गगन में। चाहता हूँ छू लेना उस चरम बिंदु को। चाहता हूँ देख लेना अपने सामर्थ्य औ...

जिंदगी इसी का नाम है

जिंदगी इसी का नाम है  (30/03/2017) ========================= मैं हैरान हूँ यह सोचकर कि मैं कहां जा रहा हूँ नियति मुझे ले जा रही है या मैं नियति के कारण जा रहा हूँ इसी के मंथन में रहता हूँ पहुंच नहीं पाता हूँ म...

दिल और दिमाग

दिल और दिमाग (,29/03/2017) ------------------------------------------ दिल और दिमाग के बीच निरंतर जंग चलता रहता है जो हमारी निर्णयन क्षमता को प्रभावित करता है। कभी दिल दिमाग पर भारी तो कभी दिमाग दिल पर भारी पड़ता है। जबकि ...

पीड़ित जनता की आवाज़

पीड़ित जनता की आवाज़(29/03/2018) ----------------------------------------------------- हे राजन् ! तुम्हें मैनें अपना राजा चुना, तुमसे मुझे बड़ी अपेक्षाएं थी। मैनें बड़े-बड़े सपने देखें थे, कि तुम उन सपनों को पूरा करोगे। तुम मेरे दुख...

डोमिनोज़

डोमिनोज़ (26/03/2017) ================= कल मैं डोमिनोज में गया हलांकि मैं खुद नहीं गया ले जाया गया, अब तक सिर्फ डोमिनोज का नाम ही सुना था। ऐसा लगा, जैसे मैं भारत से इंडिया में पहुंच गया। वहां की बिल्क...

जा कोरोना जा

काव्य संख्या-225 =========== जा कोरोना जा =========== जा कोरोना जा निर्धन के आंखों में तू मत आंसू ला जा कोरोना जा। गरीबी रूला रही है अपनों की जुदाई रूला रही है अब तू भी मत रूला जा कोरोना जा। सब कुछ ...

विकास का कैसा नारा है

विकास का कैसा नारा है (25/03/2017) ========================== यह विकास का कैसा नारा है जहां लाखों लोग भूखे सोते हैं बच्चे एक निबाले को तरसते हैं खुले आसमान के नीचे सोते हैं किसान आत्महत्या करते हैं मजदूरो...

चेतना

चेतना (24/03/2017) =============== हमारी प्रगतिशील चेतना जिसमें प्रगति तो हुई लेकिन चेतना शुष्क पड़ गई हमारा समाज जो हमें कभी अनुशासित करने का काम करता था नैतिकता का पाठ पढ़ाता था आज वह व्यक्ति-व...

मैं अन्नदाता हूं

मैं अन्नदाता हूं (23/03/2017) =================== मैं अन्नदाता हूँ वह अन्नदाता जो देश के सभी लोगों के लिए अनाज पैदा करता हूँ सबका पेट भरता हूँ कड़ाके की ठंड हो या फिर चिलचिलाती धूप हो एक नत होकर परिश्र...

मुक्ति

मुक्ति (23/03/2017) ============== भगत-सुखदेव-राजगुरु आज फिर तुम्हारी जरूरत आ पड़ी तब तुमने विदेशी आक्रांताओं से देश को मुक्ति दिलाया था आज तुम्हें , देश के आंतरिक आक्रांताओं से मुक्ति दिलाना ह...

शिक्षित होने की पहचान

शिक्षित होने की पहचान (22/03/2018) ========================== जब छोटा था / तो मैं अनजाना था / सबके यहाँ आना-जाना था / जब बड़ा हुआ तो जाना / हम हिन्दू हैं वो मुसलमान / हम ब्राह्मण हैं वो शूद्र / हां, वास्तव में, यहीं है...

रोज आती हो मेरे सपनों में

गजल (22/03/2017 =================== रोज आती हो तुम मेरे सपनों में रोज करती हो तुम प्यार की बातें। मैं भी सपनोँ को हकीकत मानकर रोज खो जाता हूँ तेरे ख्यालों में। मैं यहां तक भूल जाता हूँ कि सपने तो सपने ह...

हम-तुम

गजल (21/03/2017) =================== वर्षों बाद मैं गजल लिख रहा हूँ फर्क बस इतना है तब तुम्हारे प्यार में  लिखता था अब तुम्हारे गम में लिख रहा हूँ। आज फिर याद आ गए वो दिन वो सारी बातें छा गए मन मंदिर पर। ...

मैं प्यार के गीत कैसे गाऊं

मैं प्यार के गीत कैसे गाऊं(19/03/2017) ========================== तुम्हीं बताओं प्यार के गीत कैसे गाउँ मैं ? जहां की सत्ता निश्छल हाथों में जाती हो, जहां समाज में असहिष्णुता का माहौल फैलाने की कोशिश की जात...

विकास की आंधी

विकास की आंधी (18/03/2017) ====================== यह विकास की कैसी आंधी आयी रे जिसने निर्धन के आंखों में आंसू लायी रे जहां अन्नदाता अन्न के बिना भूखे पेट सोने को विवश हो जाते हैं वहीं पैसे वाले उसी अन्न ...

क्रांति नहीं तो और क्या करें (17/03/2017)

क्रांति नहीं तो और क्या करें ========================= भूख से बिलखती जनता की थाली में रोटी की बजाय योजनायें परोस दी गई हो तो बताओं वह क्रान्ति नहीं तो और क्या करें? किसान के ऋण को माफ करने की बजाय ...

सिसक रही है भारत माता (17/03/2017)

काव्य संख्या-171 ----------------------------------- सिसक रही है भारत माता, अपने ही लालों की करनी से / हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, पालन-पोषण में, कभी न की अंतर उसने / आखिर क्या परवरिश में कमी रह गई, कि खून के प्यासे ...