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अलविदा 2019 !

काव्य संख्या - 220 ============ अलविदा 2019 ! ============ 2019 ! तुमने तो इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया लेकिन, उनके लिए क्या किया? उनके लिए क्या छोड़ा? कभी न मिटने वाला एक अंधेरा, जिन्होंने अंधकार से लड़क...

चाहे ज़माना कुछ भी कर ले

काव्य संख्या-219 ================= चाहे ज़माना कुछ भी कर ले ================= मैं जिंदा हूं जब तक मैं बोलूंगा तब तक चाहे ज़माना कुछ भी कर ले। मैं यूं ही नहीं, बैठने वाला हूं ज़माना तू सुन ले तू मेरी बात पर ध्य...

विकास ! तुम कहां हो

विकास ! तुम कहां हो ? मैं सब जगह तुम्हें ढ़ूंढ़ रहा हूँ, शहरों में गांवो में गलियों में मुहल्लों में नहीं पता, कहीं भी तुम्हारा कितने बरस बीत गए अगर कहीँ हो, तो बताओं पेपर पत्रिक...

छोटी-सी जिंदगी

काव्य संख्या-154 ----------------------------- इस छोटी-सी जिंदगी की कथा कैसे मैं आज कहूं क्या लिखूं और क्या छोड़ू क्या भूला और क्या याद करूं कहां से शुरू और कहां खत्म करूं किसे अपना और किसे पराया कहूं ...

अंधेरा अच्छा लगता है मुझे

काव्य संख्या-159 ----------------------------- कभी-कभी अंधेरे में भी रहना अच्छा लगता है मुझे कभी-कभी कल्पना की दुनिया में भी जीना अच्छा लगता है मुझे अपेक्षाएं पूरी होती दिखती हैं मुझे कल्पनाओं में म...

ऐ शहर ! मैं लौट रहा हूं अपने गांव

काव्य संख्या-157 ---------------------------------------- ऐ शहर ! लौट रहा हूँ अपने गाँव ---------------------------------------- ऐ शहर ! जी भर गया है मेरा तुमसे अब दिल लगता नहीं मेरा यहां अब नहीं रहना है मुझे तेरे शहर में तुम्हारे शहर में खो-सी गयी ह...

दर्द

दर्द को दवा बना लिया मैंने दुख को साथी बना लिया है मैंने अब तो आदत सी बन गई है दुखों में रहने की मुझे। अब तो रहते हैं हमेशा मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट दुखों को जाम बनाकर पी लिया ...

हे मानव

हे मानव ! तुम्हीं बताओं तुम सभ्य हुए कहां? जब तुम्हारे अंदर चेतना होकर भी चेतना से शून्य हो विचारयुक्त होकर भी विचार से शून्य हो सोचन-शक्ति होने के बाद भी सोचने की तुम्हारी ...

ऐ जिन्दगी

ऐ जिंदगी तू कदम-कदम पर मेरा इंतिहा ले तू कदम-कदम पर मुझे असफल कर तू लाख ठोकरें दे मुझे मैं उठ खड़ा हो फिर संघर्ष करूंगा न मैं नियति के भरोसे बैठूंगा न मैं नियति को कोसूंगा न मै...

जिंदगी की किताब

जिंदगी की किताब को पढ़ना है नहीं आसां कभी हंसाती है कभी रुलाती है ऐ जिंदगी तेरी अजब कहानी है तू गजब का खेल खेलाती  है है इसमें इतनी गुत्थियां कि कभी सुलझती ही नहीं जितनी जा...

जिंदगी

ऐ जिंदगी तू गमों के बारात को लेकर मेरे दरवाजे पर आए हो मैं नाराज न होने दूँगा तुम्हें मैं खाली न लौटाउँगा तुम्हें स्वागत है तुम्हारा इस गरीब के दरवाजे पर अमीर दिल के साथ लो, ...

टूटते रिश्ते

सम्पत्ति चाह में छूट गए सब रिश्ते-नाते नए संबंध बनते पुराने छूटते चले गए धन अर्जन की आपाधापी में तोड़ दिए सारे सामाजिक बंधन को अब न कोई अपना रहा और न कोई पराया सारे रिश्ते-ना...

लूट

लूटो लूटो लूटो और लूटो यह देश लूटेरों का है जनता लूटने के लिए ही है पुर्तगाली डच फ्रांसीसी और अंग्रेजों के द्वारा देश को लूटा गया गोरे तो लूट कर चले गए अब लूटने की तुम्हारी ...

लोकतंत्र के प्रहरी

दीन हीन कर्महीन हमारे लोकतंत्र के प्रहरी चाह है विश्व गुरु बनने की लक्षण एक नहीं मानवता की गाते हैं विकास की नई-नई गाथा सुनो भाई इनके शासन में महिलाओं की करुण गाथा लूटते है...

स्त्री की पीड़ा

स्त्री की पीड़ा ----------------- किसे सुनाऊँ मैं अपनी  पीड़ा जिससे भी कहती अपनी पीड़ा वह और जख्म कुरेदता है मेरा समझाने लगता है वो मुझे नारी के गुण-धर्म ये मत करो वो मत करो तुम ऐसे कपड़े मत ...

विकास की बात मत करना

विकास की बात मत करना वरना देशद्रोही कहलाओगे बीच सड़क पर मारे जाओगे कसमें-वादे सब भूल जाओ ये सब चुनावी जुमले थे नेता जी जो करते हैं तुम सिर्फ समर्थन करते जाओ विरोध किया तो दे...

सपने

इन नन्हीं-सी आँखों ने बड़े-बड़े सपने पाले हैं कुछ कर गुजरने की इनमें चाहत के हिलोरें हैं लेकिन हालात के आगे ये बेबस नजर आते हैं दिखाई पड़ते हैं इनके टूटते हुए सपने गरीबी की थ...

बापू

बापू ! काश ! तुम जीवित होते, लेकिन, अच्छा है तुम नहीं हो, भारत की यह दूर्दशा तुमसे देखी नहीं जाती। जिस भारत का स्वप्न तुमने कभी देखा था, वह नहीं रहा। जिस राम-राज्य की कल्पना तुमन...

किसान

कब तक बेआबरू होते रहेंगे किसान? कब तक रूकेगा यह आत्महत्या का सिलसिला? कब तक गोलियों का शिकार होते रहेंगें किसान? कब तक उन्हें जीते जी कब्र में बैठना पड़ेगा? कब तक जिंदगी और मौ...

आओ मिलकर दिया जलाएं

काव्य संख्या-150 ----------------------------------- आओ मिलकर दीया जलाएँ ----------------------------------- आओ मिलकर दीया जलाएँ अंधियारे को दूर भगाएँ रौशन करें इस जग को एक उज्ज्वल भविष्य का सपना साकार करे आओ मिलकर दीया जलाएँ । 'स्व के...

वो आईना

काव्य संख्या-153 ----------------------- वो आइना ----------------------- वो आइना, वो बेजान आइना, वो बेजुबान आइना वो निर्जीव आइना, जो हमारे सामने आते ही सजीव हो उठता है, जो हमारे हर रूप का हमें दर्शन कराता है, हम रोओगे वो ...

सरकार

काव्य संख्या-151 ----------------------- तूने बहुत दिखाए अपने सत्ता का दंभ, तूने सत्ते की आर में खूब की है मनमानी, तूने बहुत फैलाएं हैं द्वैश खूब खेल खेले हैं तूने साम्प्रदायिकता की, कभी गाय तो कभ...

झूठ ही सही, लेकिन तुम बोलो

काव्य संख्या-158 ------------------------ झूठ ही सही, लेकिन तुम बोलो --------------------------------------- झूठ ही सही लेकिन तुम बोलो अच्छा लगता है सुनने में मुझे। अब तो आदत-सी पड़ गई है। झूठ के साथ जीना सीख लिया है मैंने तुम बोलो क...